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शुक्रवार, 13 अगस्त 2021

मेरी पसंदीदा कविता - बादल । प्रकृति का मनमोहक दृश्य का वर्णन

 

प्रकृति - जिसके आँचल में , हम है । ये हरे भरे पौधे 🌱, ये खिलखिलाते पेड़ 🌲🌲, ओर ये रंगबिरंगे फूल 🌻🌸, पत्तियां 🌿☘️ 

ये पहाड़ ⛰️ ये नदिया 🏞️ ये झरने ☄️☄️ , ओर भी सभी इस प्रकृति में है । ये सभी चीजें हमे ओर हमारी जिंदगी को सुकून दे रही है । 

हम को खुश कर रही है । 

प्रकृति की सभी चीजें एक दूसरे से जुड़ी हुई है । जैसे हम इन पहाड़ो से , इन फूलों से , फलों से ओर इन नदियों से हम से ही ये सब है । और इन से ही हम है । 

प्रकृति की इस सुंदरता का वर्णन करती हुई यह कविता हमे एक सुकून देती है । 

इस कविता का शीर्षक है । बादल  




बादल

जरा जरा से बादल आये ।

भरा भरा सा पानी लाये ।

काले काले से बादल है ।

भीगा भीगा सा आँचल है ।

पृथ्वी रानी नीचे है । 

बादल राजा ऊपर है ।

बादल राजा पानी लाये ।

पृथ्वी रानी तब पानी मांगे ।

बादलो ने फिर बारिश बुलाई ।

बारिश फिर पृथ्वी पर आयी।

बारिश जब पृथ्वी पर आयी ।

पेड़ पौधों पशु पक्षियों के मन को हर्षाये ।

जरा जरा से बादल आये ।

भरा भरा सा पानी लाये ।

- सूरज सिलोड़ी


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