प्रकृति - जिसके आँचल में , हम है । ये हरे भरे पौधे 🌱, ये खिलखिलाते पेड़ 🌲🌲, ओर ये रंगबिरंगे फूल 🌻🌸, पत्तियां 🌿☘️
ये पहाड़ ⛰️ ये नदिया 🏞️ ये झरने ☄️☄️ , ओर भी सभी इस प्रकृति में है । ये सभी चीजें हमे ओर हमारी जिंदगी को सुकून दे रही है ।
हम को खुश कर रही है ।
प्रकृति की सभी चीजें एक दूसरे से जुड़ी हुई है । जैसे हम इन पहाड़ो से , इन फूलों से , फलों से ओर इन नदियों से हम से ही ये सब है । और इन से ही हम है ।
प्रकृति की इस सुंदरता का वर्णन करती हुई यह कविता हमे एक सुकून देती है ।
इस कविता का शीर्षक है । बादल
बादल
जरा जरा से बादल आये ।
भरा भरा सा पानी लाये ।
काले काले से बादल है ।
भीगा भीगा सा आँचल है ।
पृथ्वी रानी नीचे है ।
बादल राजा ऊपर है ।
बादल राजा पानी लाये ।
पृथ्वी रानी तब पानी मांगे ।
बादलो ने फिर बारिश बुलाई ।
बारिश फिर पृथ्वी पर आयी।
बारिश जब पृथ्वी पर आयी ।
पेड़ पौधों पशु पक्षियों के मन को हर्षाये ।
जरा जरा से बादल आये ।
भरा भरा सा पानी लाये ।
- सूरज सिलोड़ी








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